13 जून 2026

भारत का पहला हॉस्पिटल-इंटीग्रेटेड SOS सिस्टम लॉन्च, इमरजेंसी में एक बटन दबाते ही पहुंचेगी मदद

लेखक न्यूज़ डेस्क · 4 जून 2026, 15:42

भारत का पहला हॉस्पिटल-इंटीग्रेटेड SOS सिस्टम लॉन्च, इमरजेंसी में एक बटन दबाते ही पहुंचेगी मदद

देश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक तकनीक आधारित एवं तेज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दिल्ली स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर (ISIC) ने हेल्थ टेक कंपनी DrRing के सहयोग से भारत का पहला हॉस्पिटल-इंटीग्रेटेड SOS वियरेबल सिस्टम लॉन्च किया है। यह अत्याधुनिक डिवाइस मेडिकल इमरजेंसी के दौरान मरीजों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।

यह वियरेबल डिवाइस दिखने में एक साधारण स्मार्ट रिंग या पेंडेंट जैसा है, लेकिन इसकी तकनीक बेहद उन्नत है। किसी भी आपात स्थिति जैसे हार्ट अटैक, गिरने, बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत या अन्य गंभीर स्वास्थ्य संकट के समय मरीज को केवल एक बटन दबाना होगा। इसके बाद सिस्टम तुरंत अस्पताल की इमरजेंसी टीम को अलर्ट भेज देगा।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अलर्ट के साथ मरीज की लोकेशन, मेडिकल हिस्ट्री और रजिस्टर्ड इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स की जानकारी भी अस्पताल तक पहुंच जाएगी। इससे डॉक्टरों को मरीज की स्थिति समझने और तुरंत उचित उपचार की तैयारी करने में मदद मिलेगी। यदि मरीज बात करने की स्थिति में नहीं है, तब भी अस्पताल और परिजन समय रहते स्थिति से अवगत हो सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कई बार मरीज अकेला होता है या उसके आसपास कोई मदद करने वाला नहीं होता। ऐसी परिस्थितियों में यह डिवाइस जीवनरक्षक साबित हो सकता है। अस्पताल को समय रहते सूचना मिलने से एंबुलेंस, डॉक्टर और इमरजेंसी स्टाफ पहले से तैयार रहेंगे, जिससे इलाज में होने वाली देरी कम होगी।

ISIC के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल भारत में डिजिटल हेल्थकेयर को नई दिशा देगी। वहीं DrRing के प्रतिनिधियों ने बताया कि इस सिस्टम को विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और अकेले रहने वाले लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार इस डिवाइस की कीमत लगभग 12 हजार रुपये रखी गई है। इसे मोबाइल एप और अस्पताल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। उपयोगकर्ता अपने स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक विवरण पहले से दर्ज कर सकेंगे, जिससे इमरजेंसी के समय डॉक्टरों को तुरंत जरूरी जानकारी मिल सके।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऐसी तकनीकें हेल्थकेयर सेक्टर में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। बढ़ती आबादी, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और आपात चिकित्सा सेवाओं की जरूरत को देखते हुए यह सिस्टम मरीजों की सुरक्षा और बेहतर उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

भारत में पहली बार किसी अस्पताल से सीधे जुड़ा ऐसा SOS वियरेबल सिस्टम लॉन्च होने से हेल्थ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं। यदि यह पहल सफल रहती है तो भविष्य में देश के अन्य अस्पतालों में भी इस तरह की सेवाएं शुरू की जा सकती हैं।

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