जालौन जिले की कोंच तहसील के ग्राम चमेंड़ में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने धन के कथित गबन और फर्जी निकासी का गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से न्याय की मांग की है। महिलाओं का कहना है कि उनके नाम पर बैंक खाते से हजारों रुपये निकाले गए, जबकि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। इस मामले को लेकर पीड़ित महिलाओं ने एसडीएम को शिकायत पत्र सौंपकर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
शिकायतकर्ता ममता पत्नी रामलखन सहित कई महिलाओं का आरोप है कि मां संतोषी महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़े फील्ड ऑफिसर मोहित तिवारी और जयपाल सिंह पुत्र रामलाल निवासी हिंगुटा ने समूह के खाते से उनके नाम पर करीब 74 हजार रुपये की फर्जी निकासी कर ली। महिलाओं का कहना है कि यह राशि उनकी जानकारी और सहमति के बिना निकाली गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
महिलाओं के अनुसार जब उन्हें इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिली और उन्होंने संबंधित लोगों से सवाल किया, तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि निकाली गई पूरी धनराशि वापस बैंक खाते में जमा करा दी जाएगी। शिकायत में कहा गया है कि इस आश्वासन के बाद एक बार 10 हजार रुपये और दूसरी बार 4 हजार रुपये जमा किए गए, लेकिन शेष राशि अब तक वापस नहीं की गई है।
पीड़िता ममता का कहना है कि इस पूरे मामले का असर उनकी वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है। उनके अनुसार वर्ष 2015 से जुड़े इस विवाद के चलते उनके नाम पर 1 लाख 3 हजार 695 रुपये की बकाया देनदारी दिखाई जा रही है। यही नहीं, उनके खिलाफ वसूली की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। इससे वह और उनके परिवार के सदस्य मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।
महिलाओं का आरोप है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो उन्हें और अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनके नाम पर निकाली गई कथित फर्जी राशि को बैंक खाते में वापस जमा कराया जाए और पूरे मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में यदि समूहों से जुड़े वित्तीय मामलों में अनियमितता या फर्जीवाड़े के आरोप सामने आते हैं, तो इससे न केवल महिलाओं का विश्वास प्रभावित होता है बल्कि सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े होते हैं।
फिलहाल यह मामला कोंच तहसील प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुका है। एसडीएम कार्यालय ने शिकायत प्राप्त कर जांच कराने का आश्वासन दिया है। अब महिलाओं की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ग्राम चमेंड़ की महिलाओं का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद है और वे चाहती हैं कि उनकी मेहनत और अधिकारों से जुड़ी राशि की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़ित महिलाओं को राहत कब तक मिल पाती है।